TORCH Test in Hindi : टॉर्च टेस्ट की पूरी जानकारी हिंदी में लक्षण, जोखिम और परिणाम

TORCH Test in Hindi : टॉर्च टेस्ट की पूरी जानकारी हिंदी में लक्षण, जोखिम और परिणाम
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TORCH Test in Hindi :

TORCH Test in Hindi एक बहुत महत्वपूर्ण टेस्ट है यह गर्भवती महिला में या नवजात में किसी तरह के संक्रमण का पता लगाया जाता है। डिटेल मे नीचे बताया गया है।

तो दोस्तो TORCH test का full form होता है

TORCH :

  • T – टोक्सोप्लाज़मोसिज़ (Toxoplasmosis)
  • O – Other (It includes HIV, Hepatitis, Varicella, Parvovirus)
  • R – Rubella (रूबेला)
  • C – साइटोमेगलो वायरस (Cytomegalo Virus)
  • H – हर्पीज सिंप्लेक्स (Herpes Simplex)

TORCH TEST क्या है । What is TORCH TEST in Hindi :

टॉर्च टेस्ट पांच इनफेक्शंस का समूह होता है

  • T – टोक्सोप्लाज़मोसिज़ (Toxoplasmosis)
  • O – Other (It includes HIV, Hepatitis, Varicella, Parvovirus)
  • R – Rubella (रूबेला)
  • C – साइटोमेगलो वायरस (Cytomegalo Virus)
  • H – हर्पीज सिंप्लेक्स (Herpes Simplex)

टॉर्च टेस्ट इन इनफेक्शंस की दो एंटीबॉडी का पता लगाता है IgG और IgM इस तरह से ये टोटल 10 टेस्ट (Torch 10 Test in Hindi) हो जाते हैं। इसलिए टॉर्च टेस्ट को टॉर्च 10 स्क्रीन भी कहते हैं।

IgG किसी पुराने इंफेक्शन को बताता है जबकि IgM नए इंफेक्शन को दर्शाता है।

टोक्सोप्लाज़मोसिज़ (Toxoplasmosis) : Toxoplasmosis पैरासाइट से फैलने वाली बीमारी होती है। इसके परजीवी बिल्ली के मल मूत्र, कच्चे अंडे और अधपका मांस में पाए जाते हैं। अगर मां इससे संक्रमित है तो बच्चे को निम्न बीमारियां हो सकती है। आंखों से कम दिखाई देना, असंतुलित दिमाग, बहरापन, झटके या दौरे आना (Seizures)

Other (दूसरे टेस्ट) : इसमें कई सारी बीमारियां आ जाती हैं जैसे हेपेटाइटिस बी और सी (Hepatitis B & C), एचआईवी (HIV), छोटी चेचक (Varicella), पार्वो वायरस (Parvovirus), खसरा (Measels),कण्ठमाला का रोग (Mumps), सिफलिस (Syphilis),एपस्टीन बार वायरस (Epstein Barr Virus)

रुबेला (Rubella) : रुबेला को जर्मन मीजल्स भी कहते हैं। रुबैला वायरस के कारण होने वाला इंफेक्शन है और यह एक इंसान से दूसरे इंसान में खांसने या छींकने से भी फैलता है, इसके कारण गर्भ के अंदर पल रहे बच्चे को कुछ डिफेक्ट्स हो सकते हैं जैसे : हार्ट की दिक्कत, आंखों की समस्या, बच्चों का कम विकास होना, साइटोमेगालोवायरस (Cytomegalovirus) साइटोमेगालोवायरस को CMV भी कहते हैं और ये हर्पिज वायरस परिवार से संबंधित होता है। इसके कारण बच्चों में निम्न डिफेक्ट्स हो सकते हैं बहरापन, कम विकास, मंदबुद्धि, एपिलेप्सी

हर्पिज सिंपलैक्स (Herpes Simplex Virus 1 & 2) : हर्पिज सिंपलैक्स वायरस गर्भ में पल रहे बच्चे को गम्भीर नुकसान पहुंचाता है जैसे– दिमाग को डैमेज कर देता है, सांस लेने की समस्या होना, झटके या दौरे आना

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टॉर्च टेस्ट क्या है? | What is TORCH test in Hindi :

इसे टॉर्च स्क्रीन टेस्ट TORCH Screen Test, टॉर्च पैनल टेस्ट के नाम से जाना जाता है, यह एक सामान्य ब्लड टेस्ट होता है। इस टेस्ट के जरिये किसी गर्भवती महिला में या नवजात में किसी तरह के संक्रमण का पता लगाया जाता है ताकि शिशु के जीवन को सुरक्षित रखा जा सके।

TORCH रोगजनकों के कारण होने वाले संक्रमण आमतौर पर वयस्कों को प्रभावित नहीं करते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाएं और शिशु अतिसंवेदनशील होते हैं। ये संक्रमण भारत में प्रचलित हैं और प्रारंभिक अवस्था में निदान करना मुश्किल है। एक गर्भवती मां से विकाशील भ्रूण में संक्रमण फैल सकता है और गर्भपात, मृत जन्म और जन्म दोष हो सकता है। इसलिए, इन संक्रमणों के लक्षणों की जांच करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

यहाँ TORCH शब्द में प्रत्येक अक्षर किसी प्रकार के वायरस या संक्रमण को दर्शाता है जिनका पूरा नाम इस प्रकार है –

  • T = (Toxoplasmosis) टॉक्सोप्लाज्मोसिस : यह एक प्रोटोजोआ परजीवी है जो मुख्य रूप से अधपके मांस के सेवन या बिल्ली के मल के संपर्क में आने से फैलता है। इसका परिणाम टोक्सोप्लाज़मोसिज़ (toxoplasmosis) हो सकता है, जो माँ में बुखार और थकान के रूप लक्षण दिखाई देते है। यदि एक भ्रूण या शिशु को ट्रासंफर होता है , तो टोक्सोप्लाज़मोसिज़ आंख में कोरॉइड (carotid) और रेटिना की सूजन यानी, कोरियोरेटिनाइटिस (chorioretinitis), मस्तिष्क में तरल पदार्थ का निर्माण (यानी, हाइड्रोसिफ़लस hydrocephalus), दाने और इंट्राकैनायल कैल्सीफिकेशन (intracranial calcifications) का कारण हो सकता है।
  • O – Other : (HIV, Hepatitis Viruses, Varicella, Parvovirus)
  • R – (Rubella) : रूबेला के मामले में, संक्रमित लार, बलगम या हवा की बूंदों के सीधे संपर्क के माध्यम से रूबेला वायरस के संपर्क में आने पर गर्भवती महिला संक्रमित हो सकती है। यह हल्के लक्षणों के साथ दिखाई दे सकता है: सूजन लिम्फ नोड्स lymph nodes (यानी, लिम्फैडेनोपैथी lymphadenopathy), पॉलीआर्थराइटिस polyarthritis, या चकत्ते। हालांकि, रूबेला जो गर्भावस्था के दौरान एक भ्रूण को ट्रांसफर होता है, उसके परिणामस्वरूप जन्मजात रूबेला सिंड्रोम हो सकता है, जो बहरापन, आंखों के बादल (यानी, मोतियाबिंद), दाने और हार्ट डिफेक्ट्स हो सकता है।
  • C – (Cytomegalovirus) : साइटोमेगालोवायरस रूबेला की तरह, साइटोमेगालोवायरस (सीएमवी) संक्रमण, शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क के माध्यम से ट्रासंफर हो सकता है, जिसमें लार, आँसू, बलगम, वीर्य और योनि तरल पदार्थ शामिल हैं। हालांकि वयस्कों के लिए सीएमवी के लक्षण आम तौर पर हल्के होते हैं । अगर यह संक्रमण गर्भ में विकास कर रहे भ्रूण में पास हो जाता है तो जन्मजात सीएमवी संक्रमण, चकत्ते, बहरापन, आंख की सूजन (यानी, कोरियोरेटिनाइटिस), दौरे, असामान्य रूप से छोटे सिर (यानी, माइक्रोसेफली), और इंट्राक्रैनील कैल्सीफिकेशन के साथ हो सकता है।
  • H – (Herpes Simplex virus) : हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस । यह वायरस दो प्रकार का होता है। HSV-1 और HSV-2
  1. HSV-1 को ओरल हर्पीज भी कहते है। HSV-1 का संक्रमण किसी के झूठन पीने से , अपना भोजन किसी और को देना या किसी और के थाली के भोजन को खुद ग्रहण करने से भी यह virus का संक्रमण होने लगता है ।
  2. HSV आमतौर पर जन्म नहर से गुजरने के दौरान नवजात को संक्रमित करता है। शिशुओं में, एचएसवी मस्तिष्क के फफोले और सूजन का कारण बन सकता है, जिसे मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (meningoencephalitis) कहा जाता है।

TORCH Test | IGG और IGM के बारे में :

जब हमारे शरीर में किसी भी तरह के अज्ञात कारक या तत्व प्रवेश करतें है तो हमारा इम्यून सिस्टम उन्हे भांप लेता है और इन हानिकारक तत्वों से शरीर की रक्षा करने के लिए antibody बनाना शुरू कर देता है। ये antibody इन अज्ञात कारकों से लड़ते है और उन्हे नष्ट कर हमारे शरीर की मदद करते है। और जो ये antibody होते हैं वही दो प्रकार के होते है जो की निम्न है–

1) Immunoglobulin G: जब हमारे शरीर मे कोई संक्रमण होने वाला होता है तो उस संक्रमण को नष्ट करने के बाद जो antibody शरीर में उपस्थित होते है उन्हे Immunoglobulin G (IGG) antibody कहते है।

2) Immunoglobulin M : जब हमारे शरीर में हाल में ही किसी प्रकार का संक्रमण हुआ रहता है तब हमारे शरीर में पाए जाने वाले antibody को immunoglobulin M antibody कहते है।

ये हमारे शरीर में मौजूद दो एंटीबॉडी IgG और IgM हैं जो इन संक्रमणों से लड़ते हैं, प्रत्येक रोगज़नक़ के खिलाफ विशिष्ट आईजीजी और आईजीएम उत्पन्न होते हैं। इस प्रकार, TORCH पैनल, IgG और IgM परीक्षण एक सीरोलॉजिकल परीक्षण है जो TORCH रोगों के खिलाफ व्यक्ति के रक्त में एंटीबॉडी IgG या IgM या दोनों की उपस्थिति की जाँच करके TORCH संक्रमण की उपस्थिति को स्थापित करता है।

TORCH संक्रमण के लक्षण क्या हैं?

TORCH संक्रमण के लक्षण अलग-अलग होते हैं। भ्रूण या नवजात शिशु में शुरुआती लक्षण शामिल हो सकते हैं

  • बुखार,
  • एक छोटे से सिर का विकास (यानी, माइक्रोसेफली)
  • जन्म के वक़्त, शिशु के वजन मे कमी होना
  • सुस्ती या नींद आना
  • मोतियाबिंद
  • सुनने की क्षमता कम
  • जन्मजात हृदय रोग
  • इसके अतिरिक्त, कुछ नवजात शिशु हेपेटोसप्लेनोमेगाली, या यकृत और प्लीहा के बढ़ने के साथ उपस्थित हो सकते हैं।
  • संक्रमित नवजात शिशुओं की त्वचा पर लाल-भूरे रंग के धब्बे (यानी पेटीचिया या पुरपुरा), त्वचा और आंखों का पीलापन (पीलिया), या “ब्लूबेरी मफिन” दाने, जो नीले या बैंगनी रंग के रूप में दिखाई दे सकते हैं।
  • बच्चे के शरीर पर निशान देर से आने वाले लक्षण, जो आमतौर पर 2 साल की उम्र के बाद होते हैं, इसमें शामिल हो सकते हैं लज़र में खराबी, बौद्धिक विकलांगता,बहरापन, और दौरे।

टॉर्च टेस्ट क्यों किया जाता है । What is the purpose of TORCH Test :

शरीर में अगर एक बार कोई एंटीबॉडी किसी विशेष एंटीजन के लिए बन जाता है तो अगली बार जब कभी भी वह एंटीजन हमारे शरीर में एंटर करता है तो हमारे इम्यून सिस्टम को उसके खिलाफ रिस्पॉन्स करना याद रहता है। इसलिए अगली बार हमारा शरीर उस एंटीजन के खिलाफ वही एंटीबॉडी बनाने लगता है। इस तरह से खून में किसी विशेष तरह के इम्यूनोग्लोबुलिन्स की जांच करके हमारे शरीर में किसी संक्रमण या दूसरी तरह की बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।

इम्यूनोडिफिशिएंसी का पता करने के लिए भी डॉक्टर इम्युनोग्लोबुलिन टेस्ट पर भरोसा करते हैं। कोई भी व्यक्ति जन्म से ही इम्यूनोडिफीसिएंसी की समस्या से ग्रसित हो सकता है या फिर आगे चलकर उसे संक्रमण, बीमारियों, कुपोषण, जलने या अन्य तरह की दवाइयों के साइड इफेक्ट्स के कारण इम्यूनोडिफिसिएंसी की समस्या हो सकती है।

या फिर किसी बच्चे में बार-बार या फिर किसी तरह का असामान्य संक्रमण होता है तो डॉक्टर उस बच्चे में इम्यूनोडिफीसिएंसी की आशंका व्यक्त कर सकती है। इम्यूनोग्लोबुलिन के स्तर की जांच शरीर में जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस, लूपस औऱ सीलिएक रोग जैसी ऑटोइम्यून स्थितियों का पता लगाने के लिए भी की जाती है।

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TORCH टेस्ट कब किया जाता है?

डॉक्टर द्वारा TORCH blood test का अनुरोध करने के कई कारण हैं।

तो दोस्तों TORCH निम्न कंडिशन में टेस्ट किया जाता है–

  1. TORCH संक्रमण के लक्षण अलग-अलग होते हैं। भ्रूण या नवजात शिशु में शुरुआती लक्षण शामिल हो सकते हैं
  2. बुखार,
  3. एक छोटे से सिर का विकास (यानी, माइक्रोसेफली)
  4. जन्म के वक़्त, शिशु के वजन मे कमी होना
  5. सुस्ती या नींद आना
  6. मोतियाबिंद
  7. सुनने की क्षमता कम
  8. जन्मजात हृदय रोग
  9. इसके अतिरिक्त, कुछ नवजात शिशु हेपेटोसप्लेनोमेगाली, या यकृत और प्लीहा के बढ़ने के साथ उपस्थित हो सकते हैं।
  10. संक्रमित नवजात शिशुओं की त्वचा पर लाल-भूरे रंग के धब्बे (यानी पेटीचिया या पुरपुरा), त्वचा और आंखों का पीलापन (पीलिया), या “ब्लूबेरी मफिन” दाने, जो नीले या बैंगनी रंग के रूप में दिखाई दे सकते हैं।
  11. बच्चे के शरीर पर निशान देर से आने वाले लक्षण, जो आमतौर पर 2 साल की उम्र के बाद होते हैं, इसमें शामिल हो सकते हैं लज़र में खराबी, बौद्धिक विकलांगता,बहरापन, और दौरे।
  12. अतः ये सभी स्थिति में TORCH टेस्ट किया जाता है।

 TORCH टेस्ट कैसे किया जाता है? | How is TORCH Test in Hindi :

TORCH टेस्ट (TORCH टेस्ट) के दौरान क्या होता है?

TORCH टेस्ट के दौरान, डॉक्टर द्वारा सबसे पहले आपके ब्लड का सैंपल (Blood sample) लिया जाता हैं। जिसके लिए आइए देखते है क्या क्या करना होता है

  • दोस्तो सबसे पहले बॉडी से ब्लड निकालने के लिए ब्लड फ्लो (Blood flow) को रोकने के लिए सबसे पहले हाथ में बैंड लगाया जाता है, जिससे नसें साफ-साफ दिखाई देने लगती हैं।
  • शिशु के खून की जांच के लिए बच्चे की एड़ी में सूई की मदद से एक छोटा सा छेंद करके सैंपल लिया जाता है।
  • उसके बाद रूई में एल्कोहॉल लगाकर डॉक्टर नसों को साफ करते हैं, जिससे सूई लगाने में आसानी होती है।
  • इसके बाद डॉक्टर आपकी नस में सूई लगाते हैं।
  • सूई से डॉक्टर खून निकालते हैं और फिर उसे एक सिरिंच में डाल देते हैं।
  • फिर बैंड को हटा देते हैं।
  • इसके बाद नसों पर रूई लगाते हैं।
  • फिर एक बैंडेज को चिपका देते हैं।
  • ऊपर बताई गई प्रक्रिया जो है TORCH टेस्ट ( TORCH Test) के दौरान की जाती है।
  • दोस्तो डॉक्टर आपको कह सकते है कि आपके पास कई दिनों तक प्रत्येक दिन रक्त के जांच के लिए। TORCH का सटीक माप प्राप्त करने के लिए कुछ ब्लड जांच आवश्यक हो सकते हैं।

TORCH टेस्ट से जुड़े जोखिम क्या हैं? | TORCH Test side effects in Hindi :

रक्त खींचने से जुड़े कई जोखिम नहीं हैं। सुई की साइट पर बाद में चोट लग सकती है, लेकिन यदि आप एक पट्टी के साथ उस पर दबाव डालते हैं, तो थोड़ा बहुत साइड इफेक्ट्स होने के संभावना हो सकते हैं। जैसा की–

TORCH Test (TORCH) के दुष्प्रभाव निम्नलिखित हो सकती है जो निम्न है_

  • चक्कर आना।
  • टेस्ट की जगह निशान पड़ना।
  • दर्द होना ।
  • इंफेक्शन का खतरा होना।
  • ब्लीडिंग अधिक होना जाना।
  • कभी कभी बुखार का भी संभावना।
  • ठंड लगना।
TORCH परीक्षण के लिए  क्या तैयारी करनी चाहिए? | How to prepare for TORCH Test in Hindi :

वैसे तो दोस्तो TORCH ( TORCH test) के लिए कोई विशेष तैयारी नहीं होती है, लेकिन अगर आप कुछ दवाओं का सेवन कर रहे हैं,या अन्य एक्टिविटी तो अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

आपके डॉक्टर को आपके रक्त परीक्षण की तैयारी के लिए सटीक निर्देश देना चाहिए। आपको कुछ दवाओं को लेना बंद करने के लिए कहा जा सकता है जो परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए अपने चिकित्सक को उन सभी दवाओं और पूरक आहारों के बारे में सूचित करें।

टॉर्च स्क्रीन पर का रिजल्ट क्या बताता है । Result of Torch Infection in Hindi :

  1. टॉर्च स्क्रीन टेस्ट का रिजल्ट या तो पॉजिटिव आता है या निगेटिव।
  2. पॉजीटिव टेस्ट रिजल्ट बताता है की मां को IgG और IgM दोनों एंटीबॉडी बनी हैं और महिला को पहले इन्फेक्शन हो चुका है या अभी ये इंफेक्शन है या फिर आपने वैक्सीनेशन करवाया है।
  3. डॉक्टरी इसे अपने हिसाब से समझ कर आगे की दवाई या ईलाज शुरू करता है।
  4. अगर ये टेस्ट निगेटिव आता है तो इसका मतलब है की आप और आपका बच्चा इन सारे इनफेक्शन्स से सुरक्षित है।
  5. सामान्यता IgG पॉजिटिव आने का मतलब है महिला को पहले ये इंफेक्शन था और अब इम्यूनिटी बन चुकी है या वैक्सीनेशन हो चुका है।
  6. IgM पॉजिटिव आने का मतलब है की महिला को अभी इंफेक्शन है।
  7. डॉक्टर को कुछ संदेह होता है तो वह यह टेस्ट कुछ समय बाद फिर से करवाता है और फिर नई और पुरानी रिपोर्टों की वैल्यू को देखता है।

TORCH Panel, IgG और IgM का परिणामों का क्या अर्थ है।

  1. सामान्यतः TORCH Panel, IgG और IgM का परिणाम कुछ घंटों में आ जाते है।
  2. यह परिमाण या तो नेगेटिव ( नकारात्मक ) या पॉज़िटिव (सकारात्मक ) में से कोई भी हो सकता है।
  3. TORCH Panel, IgG और IgM के नकारात्मक परिणाम का मतलब है कि आप और आपके कोंख में पल रहा बच्चा किसी भी संक्रमण से एकदम सुरक्षित है और आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
  4. और वही अगर आपका रिपोर्ट इसके विपरीत यानि पॉज़िटिव आता है तो यह संकेत देता है कि कुछ न कुछ तो है जिसके वजह से आपका इम्यून सिस्टम ऐसा दर्शा रहा है।
  5. इस टेस्ट के जरिये केवल संक्रमण के होने और न होने का पता लगाया जा सकता है ।
  6. पॉज़िटिव रिपोर्ट का आना किसी संक्रमण होने की तरफ इशारा करता है और इस संक्रमण के वजह को जानने के लिए डॉक्टर एडवांस टेस्ट कराने का आदेश दे सकते है।

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FAQ : TORCH टेस्ट से जुड़े सवाल जवाब?

Q. टॉर्च के साथ और कौन से टेस्ट करवाने चाहिए

डॉक्टर टॉर्च स्क्रीन टेस्ट के साथ डाउन सिंड्रोम,
डायबिटीज़,
थाइराइड और किडनी फंक्शन टेस्ट भी लिखता है।

Q. टॉर्च टेस्ट की कीमत कितनी होती है

टॉर्च टेस्ट की कीमत 2500 रुपए के करीब होती है। हर लैब और शहर में यह कीमत अलग अलग होती है।

Q. TORCH इन्फेक्शन माँ से नवजात शिशु में कैसे पास होता है ।

TORCH संक्रमण विभिन्न चरणों के दौरान एक नवजात शिशु को ट्रांसफर हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान, मां प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण को संक्रमण पहुंचा सकती है, वह अंग जो मां से विकासशील भ्रूण को ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्रदान करता है। बच्चे के जन्म के दौरान, जन्म नाल से गुजरते समय शिशु को मां से संक्रमण हो सकता है। जन्म के बाद मां के दूध के जरिए शिशु को संक्रमण पहुंचा सकती है। माताएं शुरू में विभिन्न प्रकार के विभिन्न माध्यमों से संक्रमित हो जाती हैं जो विशिष्ट प्रकार के संक्रमण पर निर्भर करती हैं।

Q. TORCH Panel, IgG और IgM का क्यों किया जाता है?

Ans– यदि किसी गर्भवती महिला को TORCH में से किसी भी virus संक्रमण हो जाता जाता है तो उस महिला के द्वारा लिए जा रहे पोषक तत्वों से, पोषण मिल रहे भ्रूण में भी यह संक्रमण हो जाता है जिससे शिशु में शारीरक विकृति , बहरापन , दिल के दौरे जैसे कई गंभीर समस्याए होने लगती है इनमें से कुछ लक्षण आमतौर पर 2 साल के बाद तक दिखाई देतें है।

TORCH Panel IgG और IgM का टेस्ट इसलिए किया जाता है ताकि IGG और IGM antibody के आधार पर किसी गर्भवती महिला के शरीर में Toxoplasmosis, Rubella, Cytomegalovirus और Herpes Simplex जैसे virus से संक्रमण होने या न होने का पता लगाया जा सके। यदि ऐसा कोई virus या संक्रमण पाया जाता है तो शुरुआती समय में ही इनका इलाज किया जा सके।

आमतौर पर शिशुओ में होने वाली जन्मजात रोगों में 2%-3% रोग का कारण TORCH में से ही कोई virus होता है।

निष्कर्ष –

दोस्तो मैं आशा करती हूं की आपको हमारा TORCH Panel test in Hindi आर्टिकल पसंद आया होगा। और इससे जुड़ी हरेक जानकारी मिली होगी। जो की आपके काफी काम आ सकती हैं। अगर आपको ऊपर बताए गए कोई लक्षण नजर आते हैं तो आपका डॉक्टर आपको यह जांच कराने की सलाह दे सकता है। TORCH Panel in Hindi से जुड़ी यदि आप अन्य जानकारी चाहते हैं तो आप हमसे कमेंट कर पूछ सकते हैं। या फिर डॉक्टर से सलाह ले सकते है।

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