pneumonia | निमोनिया | फुफ्फूसशोध :-
Table of Contents
- 1 pneumonia | निमोनिया | फुफ्फूसशोध :-
- 2 pneumonia types | निमोनिया कितने प्रकार के होते है:–
- 3 निमोनिया रोग के प्रमुख कारण :–
- 4 Lobar Pneumonia (लोबर निमोनिया ):-
- 5 Broncho Pneumonia (ब्रोंको निमोनिया ):–
- 6 निमोनिया की जांच । check up of Pneumonia in Hindi | pneumonia pathophysiology :–
- 7 निमोनिया से बचाब । Management of Pneumonia in Hindi:–
- 8 निमोनिया का इलाज | pneumonia treatment :-
- 9 एंटीबायोटिक द्वारा निमोनिया की इलाज । Treatment of Pneumonia with antimicrobial agents in Hindi | pneumonia antibiotics :–
- 10 Related
इस रोग को फुफ्फूसपाक, फुफ्फूस प्रदाह, एवं Pneumonia के नाम से जाना जाता है सरलतम शब्दों में कहे तो फेफड़ा या lungs में सूजन होना निमोनिया कहलाता है। इस रोग में फेफड़ों के ऊतकों में कठोरता या दृढ़ीकरण हो जाने से रोगी को ज्वर, खांसी तथा जल्द जल्द वा कठनाई से सांस आना आदि लक्षण दृष्टिगोचर होते है । निमोनिया रोग को उसके कारणों के अनुसार इस प्रकार का कहा जा सकता है, जैसे बैक्टीरियल निमोनिया , वायरल निमोनिया , फंगल निमोनिया , प्रोटोजोअल निमोनिया , रिकेट्सियल निमोनिया ।
pneumonia types | निमोनिया कितने प्रकार के होते है:–
बनावट के अनुसार निमोनिया रोग को नीचे लिखे दो भागों में बांटा जा सकता है
1. Lobar pneumonia ( लोबर निमोनिया )
2. Broncho Pneumonia or lobular ( ब्रोंको निमोनिया या लॉब्युलर )
जीवाणुओ के द्वारा फेफड़ों के वायुमार्ग एवं सूक्ष्म प्रणालियों में और उनसे संबंधित वायुकोष्ठो में उत्पन्न शोध से वायु मार्ग अधिक संकरा हो जाता है। इस कारण रोगी को सांस लेने में कठनाई होती है ।
निमोनिया रोग के प्रमुख कारण :–
इसको भी दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:–
1) प्राथमिक निमोनिया (primary Pneumonia):– इसमें रोग एक विशेष जीवाणु द्वारा होता है।
2) दूतियक निमोनिया (secondary Pneumonia):– श्वसन की खराबी से, कम सक्रिय जीवाणुओं के स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़ों के अंदर चले जाते हैं , और वहां पर अपनी संख्या वृद्धि कर रोग उत्पन्न कर देता है। H . Influenza, स्ट्रेपटोकोकस न्यूमोनई नामक जीवाणु दूतियक निमोनिया के लिए जिम्मेदार होता है।
Lobar Pneumonia (लोबर निमोनिया ):-
इसको न्यूमोकोकल एवं प्राइमरी निमोनिया के नाम से भी जाना जाता है। यह फेफड़ा में एक टाइप से सूजन है, जिससे फेफड़ा के एक अथवा भागो में एक जैसा दृढ़ीकरण, न्यूमोकोकाई बैक्टीरिया के इन्फेक्शन से हो जाता है।
लोबर निमोनिया के मुख्य कारण । lobar pneumonia causes :–
- लगभग 90% रोगियों में मुख्य कारण Streptococcus pneumoniae होता है इसकेअतरिक्त streptococcus पयोजिन्स, क्लेबसिला, न्यूमोनाई और बोहत से जीवाणु होते हैं।
- निमोनिया वातावरण में गर्मी सर्दी परिवर्तन में निमोनिया जल्दी हो जाता है।
- इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होने के कारण।
- ऑपरेशन के बाद फेफड़ा में स्त्राव जमा होने से ।
lobar pneumonia symptoms in Hindi । लोबर निमोनिया के लक्षण :–
- इस रोग का आक्रमण जल्दी होती है निमोनिया में सर्दी ज्यादा लगती है।
- उल्टी
- शरीर का तापमान कुछ ही घंटो में बढ़कर 39 से 40 डिग्री सेंटीग्रेड तक हो जाता है।
- खांसी होना
- बलगम या कफ कम मात्रा में निकलना लेकिन चिपचिपा होता है।
- छाती में दर्द होना
- थकान
- सिरदर्द
- संपूर्ण शरीर में दर्द
- भूख नहीं लगना
- रोगी को सांस तेज हो जाती है।
- बच्चो में, रोगी की पसलियां भीतर की ओर घुसी हुई प्रतीत होती है।
- रोगी की इस अवस्था में पीला हरा बलगम निकलता है।
लोबर निमोनिया की जटिलताएं । Complications of lobar Pneumonia in Hindi:–
श्वसन तंत्र (pulmonary):– प्लूरल इफ्यूजन, bronchiectasis, प्लूराइटिस, empyema प्लूरल कैविटी में पस,
ह्रदय (CVS):– एक्यूट pericarditis, एक्यूट circulatory failure.
न्यूरोलॉजिकल संबंधी जटिलताएं:– मेनिनजाइटिस, मेंटल कन्फ्यूजन दिमागी असंतुलन,
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Broncho Pneumonia (ब्रोंको निमोनिया ):–
इसको लॉब्यूलर निमोनिया के नाम से भी जाना जाता है। Broncho Pneumonia में फेफड़ों की जगह जगह पर संक्रमण होने के कारण इसे लॉब्युलर निमोनिया के नाम से भी जाना जाता है ब्रोंको निमोनिया में फेफड़ों के साथ साथ श्वास नलिकाओं में भी संक्रमण और छोटे छोटे घाव हो जाता है यह ज्यादातर बूढ़े और बच्चे में होता है बच्चो में खासरा, वा काली खांसी के बाद और बूढ़े लोग में दीर्घ ब्रोंकाइटिस, तीव्र ब्रोंकाइटिस अथवा इंफ्लूएंजा के बाद ब्रोंको निमोनिया होता है।
लॉब्यूलर निमोनिया के कारण । Broncho pneumonia causes in Hindi :–
- बैक्टीरिया के कारण जिसमे न्यूमोकोकई , स्टेफिलोकोकाई , एवं एच इंफ्लूएंजा पाया जाता है।
- रिकेटशीया
- वायरस
- फंगस
- जहरीली गैस
- कृमि
- इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होने के कारण
broncho pneumonia symptoms in Hindi । ब्रोंको निमोनिया या लॉब्यूलर निमोनिया के लक्षण :–
- इस रोग का आक्रमण जल्दी होती है Pneumonia में सर्दी ज्यादा लगती है।
- उल्टी
- शरीर का तापमान कुछ ही घंटो में बढ़कर 39 से 40 डिग्री सेंटीग्रेड तक हो जाता है।
- खांसी होना
- बलगम या कफ कम मात्रा में निकलना लेकिन चिपचिपा होता है।
- छाती में दर्द होना
- थकान
- सिरदर्द
- संपूर्ण शरीर में दर्द
- भूख नहीं लगना
- रोगी को सांस तेज हो जाती है।
- बच्चो में, रोगी की पसलियां भीतर की ओर घुसी हुई प्रतीत होती है।
- रोगी की इस अवस्था में पीला हरा बलगम निकलता है।
- छाती से घरघराहट की आवाज सुनाई देती है।
- इसमें रोगी की दशा lobar निमोनिया से ज्यादा ख़राब होती है।
निमोनिया की जांच । check up of Pneumonia in Hindi | pneumonia pathophysiology :–
- रक्त परीक्षा (blood test)– TLC, DLC,ESR
- बलगम (sputum microscopy)– बलगम को माइक्रोस्कोपी द्वारा देखने पर स्ट्रेपटोकोकस न्यूमोनाई मिलता है।
- स्पुटम कल्चर
- ब्लड कल्चर
- pneumonia x ray chest इसमें छोटे छोटे धब्बे दोनो फेफड़ों में देखने को मिलती है।
- ब्रॉन्कोस्कोपी
निमोनिया से बचाब । Management of Pneumonia in Hindi:–
• रोगी को पर्याप्त मात्रा में शुद्ध जल दे, रोगी के कमरे,बिस्तर, मुंह, कपड़े प्रतिदिन सफाई करे प्रतिदिन रोगी को स्पेंजिंग करे ।
• यदि रोगी को सांस कष्ट हो तो ऑक्सीजन दे।
• रोगी को सर्दी तथा अन्य रोग उत्पन्न करने वाले कारकों से बचाव करे।
• रोगी को खांसी कष्ट से राहत के लिए भापरा दे।
निमोनिया का इलाज | pneumonia treatment :-
रोगी को अधिक खांसी कष्ट होता है तो:-
- Codeine Linctus– एडल्ट रोगी को एक एक चम्मच दिन में तीन बार दे अथवा
- कोडीफोस टेबलेट –एक एक गोली दिन में तीन बार दे।
- Codeine सल्फेट टेबलेट–एक एक गोली दिन में तीन बार।
- छाती दर्द के अवस्था में दर्द निवारक (एनालजैसिक) औषधी की उचित मात्रा में प्रयोग करे।
- बुखार हल्के दर्द के कष्ट में पैरासिटामोल की एक एक गोली दिन में तीन चार बार सेवन कराएं।
- निमोनिया रोग को पता लगते ही रोगी को किसी अच्छी दवा कंपनी द्वारा निर्मित एंपिसिलीन टेबलेट / सिरप या इंजेक्शन अथवा को–ट्राईमोक्सजोल टैबलेट या सिरप का प्रयोग करे। जैसे– कैंपिसिलिन कैपसूल, सिरप, पीडियाट्रिक ड्रॉप, इंजेक्शन 500 mg का कैपसूल वयस्क रोगी को प्रत्येक 6–6 घंटे के अंतराल पर दे।
- septran टेबलेट, पीडियाट्रिक टेबलेट, सेप्ट्रान व्यस्कों रोगी के लिए 2–2 गोली दिन में दो बार सुबह शाम दे।
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एंटीबायोटिक द्वारा निमोनिया की इलाज । Treatment of Pneumonia with antimicrobial agents in Hindi | pneumonia antibiotics :–
Organism choice of drag
- Step न्यूमोनियाई। * बेंजील पेनिसिलिन, एंपिसिलिन
- हिमोफिलिस इंफ्लूएंजा। *एंपिसिलिन, को – ट्राईमोकसाजोल
- klebsiella Pneumonia । * सिफोटैक्सिम क्लोफेनिकल
- पयोजिंस। *बेंजील पेनिसिलिन, जेंटामाइसिन + फ्लूक्लोक्सासिलिन सोडियम फ्यूसिडेट
QNA निमोनिया से जुरे सवाल और जबाब
Q. निमोनिया से पीड़ित व्यक्ति को कितने दिन दवाई सेवन करना चाहिए?
निमोनिया रोग से पीड़ित रोगी के लिए प्रायः औषधि 7 से 10 दिन तक सेवन कराते हैं। यदि staphylococcal और klebsiella Pneumonia हो, समस्त औषधि कम से कम 15 दिनो तक बंद नहीं करना चाहिए, जब तक की रोगी के बलगम में जीवाणु बिल्कुल नष्ट न हो जाए। रोगी की छाती पर मालिश के लिए कोई भी क्रीम, जो दर्द निवारक हो और साथ में विटामिन सी टेबलेट रोगी को संतुष्टि हेतु दिए जा सकते हैं। रोगी को क्रोसिन सिरप अथवा मेटासिन ड्रॉप एक से दो चम्मच और विटामिन सी एक गोली ऐसी एक एक दिन में तीन बार बुखार उतरने तक दे।
Q. निमोनिया संक्रमण से बचाव के तरीके क्या है?
सबसे पहला जो तरीका है इससे बचने का तो वो है टीकाकरण शिशुओं के लिए PVC 13 और बच्चो वा व्यस्कों के लिए PPSV 23 नामक टिके लगाया जाता है न्युमोनिया से बचने के लिए दूसरा तरीका है स्मोकिंग अवॉइड करे, साफ सफाई रखना, पौष्टिक आहार लेना, व्यायाम और योगा करना।
Q. निमोनिया कौन से बैक्टीरिया के कारण होता है? pneumonia caused by bacteria |
pneumonia is caused by which bacteria.
H . Influenza, स्ट्रेपटोकोकस न्यूमोनई नामक जीवाणु निमोनिया के लिए जिम्मेदार होता है।
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