नवजात शिशु के आंकलन : जन्म के तुरंत बाद शिशु का देखभाल कैसे किया जाता है | Newborn में रिफ्लेक्स या प्रतिवर्त क्या होता है?

नवजात शिशु के आंकलन : जन्म के तुरंत बाद शिशु का देखभाल कैसे किया जाता है | Newborn में रिफ्लेक्स या प्रतिवर्त क्या होता है?
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Management of newborn । नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन:-

Assessment of the newborn । नवजात शिशु का आंकलन ।

नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन ।।जब शिशु की अम्बिलिकल कार्ड काटकर मां से अलग कर दिया जाता है, तो उसे सेल्फ का सांस और परिसंचरण स्थापित करना पड़ता है । इसके लिए शिशु को एक्स्ट्रा यूटरिन जीवन से समायोजन और अनुकूलन करना पड़ता है ! नवजात शिशु आंकलन के लिए निम्न चरण बनाया गया है :–
1) आपगार स्कोर निकालना
2) ह्रदय श्वसनीय कामों में विफलता
3) ताप नियंत्रण
4) अन्य देखभाल ।

नवजात शिशु के आंकलन : जन्म के तुरंत बाद शिशु का देखभाल कैसे किया जाता है | Newborn में रिफ्लेक्स या प्रतिवर्त क्या होता है?

नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के लिए अपगार स्कोर क्या है अपगोर स्कोर कैसे निकालते है?

1) Aapgar scale :-
नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के समय आपगार स्केल विधि शिशु के दशा का त्वरित आंकलन किया जाता है ! यह जन्म के तुरंत 1 मिनट बाद वा 5 मिनट बाद किया जाना चाहिए इस स्कोरिंग में शिशु के 5 जीवन चिन्हों ह्रदय धड़कन दर, सांस दर, पेशीय तन्यता उतेजनशीलता वा शिशु के रंग का मूल्यांकन कर उन्हें 0,1 वा 2 अंक प्रदान किया जाते है 8–10 स्कोर का अर्थ हैं की नवजात की दशा श्रेष्ठ है और वह बाह्य ग्रभासायी जीवन से आसानी से समायोजन कर रहे है ! स्कोर 5–6–7 इंगित करता है की नवजात को स्वतंत्र जीवन में मध्यम दर्जे की परेशानी है, दशा ठीक ठाक है! लेकिन, शिशु को ambu –bag की जरूरत है, जबकि 5 से कम स्कोर का अर्थ है की शिशु को तुरंत विशिष्ट देखभाल की जरूरत है! जैसे endotrechial tube, इंटुबेशन आदि!

2) नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन ह्रदय respiratory कार्यों में सहायता । Supports of cardiorespiratory functions ।।
A) positioning :-नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के समय शिशु को पीठ के बल लिटाकर गर्दन को थोड़ा सा extend करते है ! इसके लिए 3/4 इंच मोटा कॉटन रोल उसके कंधो के नीचे रख सकते है !
B) cleaning airway:- नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के लिए जरूरी है:— नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के समय कंडिशन position देकर तुरंत बल सीरिंज या saction मशीन से मुंह, नाक वा phyrinx का saction करे ! यह सांस शुरू करने के लिए काफी है सामान्यतः इसके बाद शिशु रोने लगता है, शिशु का रोना उसमे सांस शुरू का सूचक है !
C) स्पर्श उद्दीपन:- नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन ।।( tactile stimulation):—
नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के समय पैर के तलवे पर एक दो थपकी मारने एवं पीठ को रगरने से बच्चो का सांस शुरू हो जाता है ! यदि इसके उपरांत भी बच्चो में सांस शुरू नही होता है तो अधिक saction या उद्दीपन में समय खर्च नही करके अन्य पूर्णजीव तकनीक अपनाना चाहिए!

3) ताप नियंत्रण, नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के लिए जरूरी है ( temprature control):—
नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के समय शिशु का शारीरिक तापमान वातावरणीय ठंडक वाष्पोत्सर्जन एवं गीले वा नग्न शरीर से ऊष्मा नष्ट के कारण गिर सकता है इस हेतु शिशु को शुष्क वा स्वच्छ तौलिए से कोमलता से पोछकर गर्म कंबल में ढककर या ऊष्मा विकिरण युक्ति में रखते है ! माता के शरीर से चिपकाकर सुलाने से भी तापमान नियंत्रित रहता है !

4) नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के लिए अन्य देखभाल ( other care ):—
A) observation :– बच्चो का अपगार scoring करे वा जन्मजात विकृतिया को पहचाने !
B) पहचान चिन्ह ( identification):– शिशु को पहचान टैग बांधे जिसमे माता का नाम लिखा हो शिशु के पैर चिन्ह , हथेली चिन्ह , फोटोग्राफ पहचान के लिए प्रिंट करते है !
C) डॉक्यूमेंट :– शिशु का रजिस्ट्रेशन नंबर , लिंग , डिलीवरी के दिन , समय , वजन , लंबाई , सिर की परिधि इत्यादि को नोट करे !
D) care of eyes :– swab ya bandage को नॉर्मल सलाइन में भिगोकर आँख को साफ करते है !
E) care of skin :— स्वच्छ वा मुलायम कपड़े से कोमलता से नवजात पर चिपका हुआ uterus blood ,mucous वा सेक्रेशन हटाकर शिशु को साफ कपड़े में लपेट दे , शरीर पर उपस्थित सफेद मोम जैसी परत को जोर से हटाने की कोशिश नही करना चाहिए !

नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के लिए सामान्य स्वरूप (general appearance ) जैसे :–

शारीरिक स्थिति (posture) :–नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के लिए इस प्रकार ध्यान देना होता है full term new born का शरीर generalized flexion में रहता है, feet dorsiflexed, extremities a neck fully flexion में होता है परंतु कालपूर्व जन्मे नवजात शिशु में Erbs palsy हो सकती। इस पक्षाघात की उत्पत्ति जन्म के समय brachial nerve अथवा lower cervical nerve के क्षतिग्रस्त होने से होती है इसमें नवजात शिशु का एक हाथ extension की स्थिति में दूसरी हाथ flexion में होगा ।

क्रियाशीलता (activity) :– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के समय अगर शिशु सचेत वा चंचल होता है loud noise को सहन करने तथा उसके प्रति response को देखकर उसकी activeness का पता लगा सकते है तो शिशु स्वस्थ है। किसी प्रकार का न्यूरोलॉजिकल डिस्टर्बेंस होने पर नवजात शिशु निद्रालु तथा इरिटेबल होता है – sleepy dull

सिर (head) :– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन anterior fontancel 2.5 cm लंबा तथा 4 cm चौड़ा होने के साथ हीरे समान आकृति का होता है posterior fontenel, 0.5 multiple 1cm माप का होता है नॉर्मल fontanels चपटे तथा दृढ़ होता है रोते तथा खासते समय ये ऊपर उठ जाया करते है यदि निर्जलीकरण हो जाए तो फॉन्टेनेल्स धस जाते हैं

कान (ear) :– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में यह भी ध्यान देना होता है बाहरी कान का pinna चपटा होता है क्योंकि गर्भाशय में सिर पर दवाब रहता है तथा शिशु lateral position में होता है

नेत्र (eyes) :– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन जन्म के समय नेत्र बंद रहते है । Bright light में पलक मारना एक अथवा दो महीने तक आंसू न निकलना पाया जाता है । किसी प्रकार का pus discharge दिखाई देने पर इसका अर्थ यह होता है कि नवजात शिशु ophthalmia neonatorum का रोगी है

नाक (nose) :– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के मुख को बंद करके एक nostril को press कर air entry तथा को choanal patency की जांच की जा सकती है। Nosal flaring से आशय है respiratory distress.

गर्दन ( neck):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन के समय ये भी देखे शिशु की गर्दन छोटी होती है जिसपर उतको की folds पाए जाते हैं। इसके range of motion की जांच की जाना चाहिए तथा इसकी आकृति वा किसी तरह के abnormal mass आदि हेतु रखनी चाहिए

मुंह (mouth):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में मुख का परीक्षण उसकी वर्तमान संरचना तथा स्तन चूसने के प्रतिवर्त के लिए किया जाना चाहिए

फेफड़ा (lungs):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन आरंभ में श्वसन बलपूर्वक होता है जिसको बाद में आसान तथा नियमित हो जाना चाहिए ।

ह्रदय (heart):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन शिशु की सामान्य ह्रदय गति 120 से 140 प्रति मिनट होनी चाहिए

उदर (abdominal):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में शिशु का नॉर्मल उदर बेलनाकार वा स्पष्ट होता है । जन्म के कुछ घंटे बाद आंतो की साउंड सुनाई देने लगती है नाभिनाल में 2 धमनियां तथा 1 शिरा होती है जिनको परखना चाहिए नाभिनाल जन्म के समय नीले – सफेद रंग की तथा नम होती है यकृत 1 से 3 cm का था palpable होता है

स्त्री जननांग (female genitalia) :–नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में दोनों तरह के labias तथा clitoris की अच्छी तरह जांच की जानी चाहिए जन्म के बाद पहले सप्ताह में योनि से रुधिर समान स्राव को देखते रहे ।

पुरुष जननांग ( male genitalia ) :– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन शिश्न पर urethral opening के स्थान की जांच की जानी चाहिए समन्यतः मूत्र नाल छिद्र शिश्न के शीर्ष पर होता है कभी कभी यह छिद्र glans penis ke आवरण से ऊपर अथवा अन्य स्थानों पर भी पाया जाता है इसको जबरदस्ती हटाने का प्रयास न करे ।

पीठ तथा रीढ़ ( back & spine ):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में ये भी देखा जाता है back हल्की सी गोलाकार होती है इसकी जांच किसी भी तरह के असमान्य छिद्र तथा पिण्ड हेतु करना चाहिए जैसे spina bifida , meningocele आदि हेतु जांच करना ।

उपांग (extremity):–नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में शिशु में ऊपरी तथा निचले उपांग में समरूपता तथा उसकी उपस्थिति सामान्य होती है गति की सीमा , malformation , reflexes तथा पेशी तनाव (muscle tone) आदि हेतु इनकी विधिवत जांच की जानी चाहिए ।

नवजात शिशु के आंकलन : जन्म के तुरंत बाद शिशु का देखभाल कैसे किया जाता है | Newborn में रिफ्लेक्स या प्रतिवर्त क्या होता है?

नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में neurological assessment (स्नायविक निर्धारण) | नवजात शिशु के रिफ्लेक्स यानी प्रतिवर्त के बारे में

स्वच्छ मण्डली प्रतिवर्त ( corneal reflex):–नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में जब सामान्य नवजात शिशु के cornea को छूते हैं तो उसके द्वारा अपने पलके बंद कर ली जाती है इसको blinking reflex भी कहा जाता है।

तारा प्रतिवर्त (pupillary reflex):– नवजात शिशु के आंकलन । यदि सामान्य नवजात शिशु के नेत्रों पर तीव्र प्रकाश पड़ता है तो नेत्रों की तारा छोटा यानी constrict हो जाया करती है।

गुड़िया नेत्र प्रतिवर्त ( dolls eye reflex ):–नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन में नवजात शिशु के सर को दाएं से बाएं घुमाया जाता है तो उसके नेत्र एकदम नवीन स्थिति में अपने सामान्य स्थान पर नहीं आ पाते है जन्म के दो सप्ताह तक यह अवस्था बनी रहती है

छींक प्रतिवर्त (sneeze reflex ):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन सामान्यतः नवजात शिशु की नाक में irritation होने से छींक आती है

Glabellar reflex :– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन सामान्य नवजात शिशु में पाया जाता है इसमें glabella पर उंगली से टैपिंग करने पर उसके द्वारा नेत्र बंद कर लिया जाता है

चूषण प्रतिवर्त ( sucking reflex ) :–नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन जन्म के आधे घंटे के भीतर ही सामान्य नवजात शिशु में इस प्रतिवर्त का विकास हो जाता है

थूथनी खोज प्रतिवर्त (rooting reflex):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन यह प्रतिवर्त सामान्य नवजात शिशु में पाया जाता है इसमें गालों को छूने पर उसके द्वारा उसी ओर अपने सिर को घुमा दिया जाता है अथवा चूचक गाल पर लगते ही उसके द्वारा उसी ओर अपने सिर को घुमा लिया जाता तथा दूध पीना आरंभ कर दिया जाता है।

Gag reflex :–यह सामान्य नवजात शिशु में उपस्थित होता है यह खाने के कारण ( posterior pharynx ) के stimulation के कारण होती है । इसके द्वारा suck किए हुए दूध को शिशु को भीतर लिया जाता है तथा आवश्यकता से अधिक दूध अथवा किसी अन्य मुख में रखे पदार्थ को निगलने के स्थान पर बाहर निकलता है

जंभाई प्रतिवर्त ( yawn reflex ):– नवजात शिशु के आंकलन शिशु के जन्म के तुरंत बाद देखभाल वा आंकलन तुरंत नहीं होता है प्रतिवर्त शिशु में पाया जाता है इसमें inspired air की मात्रा अधिक तथा मुख खुल जाता है । ऐसा शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण होता है

खांसी प्रतिवर्त (Cough reflex):–यह प्रतिवर्त नवजात शिशु में नहीं पाया जाता है इसका विकास बाद में होता है । इसमें गले , श्वासनाली वा शवस्नियो में भरे पदार्थ बाहर निकलते है ।

पकड़ प्रतिवर्त (grasp reflex):– नवजात शिशु के आंकलन में यह प्रतिवर्त सामान्य नवजात शिशु में पाया जाता है इसमें जन्म के उपरांत उसके द्वारा वस्तुओं को हाथो वा पैरो से जोर से पकड़ लिया जाता है इसका डार्विन प्रतिवर्त भी कहा जाता है ।

अन्य प्रधान प्रतिवर्त (other major reflexes):–
मोरो– प्रतिवर्त (moro reflex)– यह प्रतिवर्त सामान्य नवजात शिशु में पाया जाता है यह एक तरह से घबराने की अनुक्रिया है जिसमे नवजात शिशु को भयभीत करने पर अथवा उसके पास धमाके जैसी आवाज की जाने पर वह एकदम घबरा कर कांप जाता है उसके द्वारा इस तरह अपने पैर उठा लिया जाता है की उसके दोनो तलवे तथा पैरों के अंगूठे एक दूसरे को छूने लगते हैं तथा दोनो हाथ ऊपर उठ लिए जाते है जन्म के उपरांत पांच सप्ताह तक यह प्रतिवर्त दिखाई दे सकता है यह 12 सप्ताह के बाद बिल्कुल समाप्त हो जाया करती है neurological रोग होने पर यह शिशु में नही पाया जाता है

इसे भी पढ़े :– डिमेंशिया या मनोभ्रम बीमारी क्या है ?करण ,निवारण क्या है ?

QNA:–

Q.) नवजात शिशु का देखभाल कैसे किया जाता है?
Ans :– ऊपर के विवरण को देखें
Q.) नवजात शिशु के जन्म के तुरंत बाद कैसे देखभाल किया जाना चाहिए?
Ans :– ऊपर व्याख्या किया गया है
Q.) Delivery के बाद newborn को कितने बार feeding करवाना चाहिए?
Ans:– newborn baby को 8 से 12 बार feeding करवाना चाहिए

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